नमस्कार एवं स्वागत दोस्तों!! यह ब्लॉग दुनिया की आधी आबादी के नाम है। कवि - श्री राज्यवर्द्धन जी द्वारा 24 अगस्त'2018 को रचित कविता हम सबको समर्पित है... *स्त्रियां जब खिलखिलाती हैं* -------------------------------- धरती ठहर जाती है घूमते हुए और सुनने लगती है- स्त्रियों की हँसी जब कभी भी , जहाँ कहीं भी पृथ्वी पर सुनाई पड़ती है। धरती माता के कान थक गए हैं स्त्रियों की सिसकियां और चीख सुनते सुनते सदियों से। स्त्रियां तुम हँसो ,ठिठोली करो हर वह अवसर की तलाश में रहो जब खिलखिला सको। स्त्रियां जब खिलखिलाती हैं पृथ्वी का दुःख तब कम हो जाता है! ********** लंबे समय से एक हिंदी भाषी मंच कीं आवश्यकता महसूस हो रही थी मुझे; जो विशेषतः उस वर्ग के लिए हो जिनकी आवाज़ यहां मुखर हो उठे। यहां उपरोक्त कविता इस उद्देश्य को सार्थक करती है। मेरा अनुरोध उन सभी लोगों से है जो मेरी बातों से इत्तेफ़ाक़ रखते हों और समय समय पर अपने अनुभव, ज़िन्दगी से जुड़े किस्से, कहानियां, कविताएं, संस्मरण इत्या...