आसान नहीं होता

हाल ही में अपनी मां को देखने जाना हुआ। उम्र के सातवें दशक को पार करने की दहलीज पर खड़ी कैंसर ग्रस्त और अकेलेपन से जूझते जीवन को क्या तसल्ली दूँ???? संयुक्त परिवार से भरे पूरे घर में सबकी ज़रूरतों का ख़याल रखते हुए जिसे कभी कभी अपने बच्चों को भी भरपूर वक़्त देना नसीब न हुआ उस मन के अकेलेपन की छटपटाहट को कौन समझ पायेगा??           

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